अहमद रज़ा ख़ान के सूफ़ी उद्धरण
ख़ुदा के चुने हुए बंदे रिज़्क़ की फ़राहमी को आसान बनाते हैं, मुसीबतों को दूर करते हैं, बुलंद मर्तबा अता करते हैं और दुनिया के मामलों के लिए तदबीर फ़रमाते हैं। उन्हीं के तुफ़ैल बारिश बरसती है और ज़मीन का निज़ाम क़ायम है।
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सूफ़िया-ए-किराम की अरवाह विसाल के दिन अपनी क़ब्रों की तरफ़ मुतवज्जेह होती है, चुनाँचे उन के विसाल का मख़्सूस वक़्त रूहानी फ़ैज़ हासिल करने के लिए सब से मौज़ूँ होता है।
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यह सूफियों का क़ायदा है कि फ़क़्र उन का श्रृंगार हो, सब्र उन का आभूषण हो, रज़ा (संतोष) उन की सवारी हो, और तवक्कुल (विश्वास) उन की शान हो।
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ये विलायत की निशानी है कि इंसान ख़ुदा के तमाम बंदों पर शफ़क़त करे, उन से रहमदिली बरते। उन के लिए और उन के साथ बुरी ताक़तों के ख़िलाफ़ जद्दोजहद करे।
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ये बेहतर है कि दूसरों के नेक आमाल को ज़ाहिर किया जाए और उन के बुरे कामों से आँख बचा ली जाए।
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ख़ुदा के आशिक़, ख़ुदा के नूर से आसमान और ज़मीन की छिपी हुई चीज़ों को देखते हैं। इसलिए अपने आप को उन की तरह न समझो।
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दुनिया की लज़्ज़तों की ख़्वाहिश रखने वाले लोग उस शख़्स की मानिंद है, जो समंदर के खारे पानी से अपनी प्यास बुझाता है। वो जितना ज़्यादा पानी पीता है, उस की प्यास उतनी ही बढ़ती जाती है।
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خدا کے محب اس کے نور کے ذریعے آسمان و زمین کی تمام پوشیدہ چیزوں کو دیکھتے ہیں، لہٰذا اپنے آپ کو ان جیسا مت سمجھو۔
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere