Sufinama

susti makun o fariza-e-haq ba-guzar

Omar Khayyam

susti makun o fariza-e-haq ba-guzar

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    sustī makun o farīza-e-haq ba-guzār

    dar ohda-e-āñ jahāñ manam baada bayār

    dar ḳhūn-e-kase-o-māl-e-kase qasd makun

    vaañ luqma ki daarī ze-kasāñ baaz madār

    सुस्ती में मत पड़ा रह और ख़ुदा के लिए अपने फ़राएज़ पर अमल कर। उस दुनिया का बोझ मैं अपने सिर पर लेता हूँ। बस शराब ला, मुझे और कुछ नहीं चाहिये। किसी के जान और माल को लेने का खुछ भी विचार मत कर और जो कुछ भी तुझे हासिल है, उसमें से दूसरों को भी दे।

    susti makun o fariza-e-haq ba-guzar

    dar ohda-e-an jahan manam baada bayar

    dar KHun-e-kase-o-mal-e-kase qasd makun

    wan luqma ki dari ze-kasan baz madar

    सुस्ती में मत पड़ा रह और ख़ुदा के लिए अपने फ़राएज़ पर अमल कर। उस दुनिया का बोझ मैं अपने सिर पर लेता हूँ। बस शराब ला, मुझे और कुछ नहीं चाहिये। किसी के जान और माल को लेने का खुछ भी विचार मत कर और जो कुछ भी तुझे हासिल है, उसमें से दूसरों को भी दे।

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