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मेरा सलाम ले जा

हफ़ीज़ जालंधरी

मेरा सलाम ले जा

हफ़ीज़ जालंधरी

MORE BYहफ़ीज़ जालंधरी

    क़िस्मत के आसमाँ पर

    सीमा-ए-कहकशाँ पर

    चमका तिरा सितारा

    उस दर पे हाज़िरी का

    तुझ को हुआ इशारा

    बख़्तियार बंदे

    कामगार बंदे

    तेरी मुराद-मंदी

    तक़दीर की बुलंदी

    तुझ को पुकारती है

    बारयाब हो जा

    ज़र्रा-ए-मोहब्बत

    जा आफ़ताब हो जा

    दरबार में चला है

    सरकार में चला है

    रख़्त-ए-सफ़र उठा ले

    अल्लाह के हवाले

    यसरिब के जाने वाले

    बस इक पयाम ले जा

    मेरा सलाम ले जा

    मेरी ये सर्द आहें

    ये मुंतज़िर निगाहें

    उन का ख़याल करना

    लेकिन नहीं मुनासिब

    कुछ ‘अर्ज़-ए-हाल करना

    वो जानते हैं सब कुछ

    पहचानते हैं सब कुछ

    नाशाद आरज़ूएँ

    बर्बाद आरज़ूएँ

    बे-ताब हो रही हीं

    ता-हम ख़मोश रहना

    आँखों से देखता जा

    मुँह से मगर कहना

    ये सुब्ह-ओ-शाम मेरे

    सब सामने हैं तेरे

    उन से कोई भलाई

    देती नहीं दिखाई

    ले जा सके तो भाई

    ये सुब्ह-ओ-शाम ले जा

    मेरा सलाम ले जा

    हर चीज़ खो चुका हूँ

    बर्बाद हो चुका हूँ

    ये ज़िंदगी है मेरी

    इस वक़्त पास मेरे

    शर्मिंदगी है मेरी

    कुछ अरमुग़ाँ नहीं है

    जुज़ ईन-ओ-आँ नहीं है

    मुफ़्लिस हूँ बे-नवा हूँ

    कुछ भी नहीं क्या हूँ

    तोहफ़े माँग मुझ से

    नादिम कर ख़ुदा-रा

    दिल तेरी पास हो तो

    दे दे मुझे उधारा

    मेरा कलाम क्या है

    ये अरमुग़ाँ ख़ुशी से

    चाहे तो हाँ ख़ुशी से

    मेहरबाँ ख़ुशी से

    ये जिंस-ए-ख़ाम ले जा

    मेरा सलाम ले जा

    फ़रियाद-ओ-हा-ओ-हू में

    सहबा-ए-आरज़ू में

    वो जोश ही नहीं है

    टूटा हुआ भी है दिल

    ख़ामोश ही नहीं है

    सरशार करने वाली

    शय हो चुकी है ख़ाली

    मय-ख़ाना-ए-यकीं से

    उस कैफ़-ए-बेहतरीं से

    ईमान-ए-आतिशीं से

    फिर उस को भर के लाना

    मेरा सलाम ले जा

    ये अश्क-रेज़ आँखें

    तूफ़ान-ख़ेज़ आँखें

    अब ख़ुश्क हो चुकी हैं

    दरिया कहाँ से लाएँ

    क़तरे को रो चुकी हैं

    वर्ना ये आरज़ू थी

    मुद्दत से जुस्तुजू थी

    कश्ती बना के दिल को

    और फिर सजा के दिल को

    यसरिब के जाने वाले

    उस में तुझे बिठाऊँ

    दुनिया-ए-सरमदी के

    साहिल पे ले के जाऊँ

    ख़ैर दिलेर क़ाइद

    होती है देर शायद

    जा हर तरह सलामत

    ले जा मेरी मोहब्बत

    ले जा मेरी 'अक़ीदत

    मेरा सलाम ले जा

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