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दकनी सूफ़ी काव्य
रियाज़ उल आरफ़ीन
सैर बादी के नमन करता फिरूँलाल हो कब कोह में करता हूँ ठार
इसहाक़ बीजापुरी
दकनी सूफ़ी काव्य
तूतीनामा- चुन उस गोहराँ के समन्द का गम्भीर
कहा गर उसे मना करता हूँ मैंतो मैने के नमन मरता हूँ मैं
मुल्ला ग़व्वासी
महाकाव्य
।। रसप्रबोध ।।
लखत होत सरसिज नमन आली रवि बे और।अब उन आँनद चंद हित नयन करयो चकोर।।999।।
रसलीन
दकनी सूफ़ी काव्य
अमृत घड़ी में खुशियाँ तबल बजाये
ज़हरा नमन महाफ़े (?) रोशन है इस अगन मेंया सूर की है किरनाँ जोतॉ सू सर उचाये