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ना'त-ओ-मनक़बत
ख़ालिद नदीम बदायूँनी
सूफ़ी लेख
बेदम शाह वारसी और उनका कलाम
तकमील नूर-ए-ऐन की बेदम ने की है यूँशज़रए नस्ब लिखा है वह भी वारसी .
सुमन मिश्र
ना'त-ओ-मनक़बत
जान-ए-जानान-ए-पैग़म्बर फ़ातिमा का नूर-ए-ऐनख़्वाजगान-ए-चिश्त का दूल्हा बना कलियर में है
अमीर बख़्श साबरी
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ना'त-ओ-मनक़बत
नूर-ए-’ऐन-ए-मुस्तफ़ा मौला 'अली के दिल का चैनहैं शहीद-ए-कर्बला जान-ए-क़रार-ए-फ़ातिमा
अरशद जबलपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ नूर-ए-’ऐन-ए-मुस्तफ़ा फ़रियाद-रस फ़रियाद-रसवै मज़हर-ए-शेर-ए-ख़ुदा फ़रियाद-रस फ़रियाद-रस
शाह आयतुल्लाह क़ादरी
सलाम
नूर-ए-ऐ'न-ए-मुर्तज़ा हैं नूर-ए-'ऐन-ए-मुस्तफ़ाअस्सलाम ऐ शम'-ए-वहदत शेर-ए-यज़्दाँ अस्सलाम
ख़ालिद नदीम बदायूँनी
दोहा
बुल्लया जैसी सूरत ऐन दी, तैसी ग़ैन पछान ।
बुल्लया जैसी सूरत ऐन दी, तैसी ग़ैन पछान ।इक नुकते दा फेर है, भुल्ला फिरे जहान ।।
बुल्ले शाह
दोहरा
बुल्ल्हआ जैसी सूरत ऐन दी, तैसी सूरत ग़ैन।
बुल्ल्हआ जैसी सूरत ऐन दी, तैसी सूरत ग़ैन।इक नुक्कते दा फेर है , भुल्ला फिरे जहान ।
बुल्ले शाह
सूफ़ी कहावत
ता नदानी की सुख़न ऐन सवाबस्त मगो
जब तक आपको यक़ीन न हो कि बात पूरी तरह सही है, कुछ मत कहिये



