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सूफ़ी कहानी
एक आ’राबी का ख़लीफ़ा-ए-बग़दाद के पास खारी पानी बतौर तोहफ़ा ले जाना - दफ़्तर-ए-अव्वल
अगले ज़माने में एक ख़लीफ़ा था जिसने हातिम को भी अपनी सख़ावत के आगे भिकारी बना
रूमी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा-ए-फ़ख़्र-ए-जहाँ देहलवी
ये हज़रत फ़ख़्र-ए-जहां की बदौलत हुआ कि चिश्ती ख़ानक़ाहों में नई रौनक़ पैदा हो गई।हज़रत फ़ख़्र-ए-जहां
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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सूफ़ी लेख
अमीर ख़ुसरो की सूफ़ियाना शाइ’री - डॉक्टर सफ़्दर अ’ली बेग
जिस किसी को मिन-जानिबिल्लाह नज़र की पार्साई अ’ता हो गई हो उसे मा’शूक़ों के रुख़्सार को
फ़रोग़-ए-उर्दू
सूफ़ी लेख
हज़रत शैख़ जलालुद्दीन तबरेज़ी
देहली में आमदः आप जब दिल्ली तशरीफ़ लाए तो सुल्तान शम्सुद्दीन अल्तमिश ने आपका इस्तिक़बाल किया।
डाॅ. ज़ुहूरुल हसन शारिब
व्यंग्य
मुल्ला नसरुद्दीन- दूसरी दास्तान
"फिर ख़ोजा नसरुद्दीन?... इस में भी ख़ोजा नसरुद्दीन? हर जगह ख़ोजा नसरुद्दीन? जब कि तुम..." इतना
लियोनिद सोलोवयेव
सूफ़ी साहित्य
रिसाल:-ए-साहिबिया
सच्च ये है कि वस्ल-ए-ज़ात और हुसूल-ए-मआ’नी-ए-सफ़ा का ये अंदाज़ा, मेरे हज़रत से मख़्सूस है और
जहाँ आरा बेगम
सूफ़ी लेख
हज़रत अमीर ख़ुसरौ
आपका आइंदा ख़िताबः आपके दिल में एक दिन यह ख़याल गुज़रा कि आपका तख़ल्लुस दुनियादारों का
डाॅ. ज़ुहूरुल हसन शारिब
सूफ़ी लेख
Fawaid-ul-Fawaad (Morals For The Heart) – Book review
पाँचवी जिल्द – इस जिल्द में हज़रत की 32 मजलिसों का उल्लेख है जिन्हें अज़रा शाबान
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन मुनव्वर निज़ामी
हज़रत ने पूछा कहा इस जाने में मेरा इख़्तियार है या नहीं? हसन ने जवाब दिया
मुनादी
सूफ़ी लेख
सूफ़ी ‘तुराब’ के कान्ह कुँवर (अमृतरस की समीक्षा)
वस्तुतः हिन्दी के राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित होने से पहले अधिकतर पूर्व, उत्तर तथा मध्य
बलराम शुक्ल
सूफ़ी कहानी
एक शख़्स का शैख़ अबुल-हसन ख़रक़ानी की ज़ियारत को आना और उनकी बीवी की बद-ज़बानी - दफ़्तर-ए-शशुम
आदमी के होश-ओ-हवास के आगे शैतान वस्वसा लाया करता है जिससे चांद गर्द में छुप जाता