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पद
अज्ञेय ब्रह्म - ऐसा ब्रह्म अखंडित भाई, वा पार जान्यौ नहिं जाई ।।
ऐसा ब्रह्म अखंडित भाई, वा पार जान्यौ नहिं जाई ।।ऐसा ब्रह्म अखंडित भाई, वा पार जान्यौ नहिं जाई ।।
सुंदरदास छोटे
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ जान-ए-मा ऐ जान-ए-मा ऐ कुफ़्र-ओ-ईमान-ए-माख़्वाहम कि ईं ख़र-मोहरः रा गौहर कुनी दर कान-ए-मा
रूमी
ना'त-ओ-मनक़बत
जान-ए-जान-ए-मुस्तफ़ा-ओ-मुर्तज़ा आने को हैसय्यदा की गोद में इक मह-लक़ा आने को है
सय्यद फ़ैज़ान वारसी
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ना'त-ओ-मनक़बत
वासिफ़ रज़ा वासिफ़
ग़ज़ल
जान-ओ- दिल सीं मैं गिरफ़्तार हूँ किन का उन काबंदा-ए-बे-ज़र-ओ-दीनार हूँ किन का उन का
सिराज औरंगाबादी
सूफ़ी कहावत
जो बंदा नवाज़ी करे, जान उस पर फ़िदा है।
जो बंदा-नवाज़ी करे, जान उस पर फ़िदा हैब-फ़ैज अगर यूसफ़-ए-सानी है, तो क्या है?
वाचिक परंपरा
दोहरा
दम दम जान लबां पर आवे छोड़ि हवेली तन दी
दम दम जान लबां पर आवे छोड़ि हवेली तन दीखली उडीके मत हुन आवे किधरों वा सजन दी
मियाँ मोहम्मद बख़्श
शे'र
शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जानचाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में


