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सूफ़ी लेख
तज़्किरा-ए-फ़ख़्र-ए-जहाँ देहलवी
(1199 हिज्रीअब चंद वारदात-ओ-मकशूफ़ात मुलाहिज़ा फ़रमाएं:
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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सूफ़ी लेख
अमीर ख़ुसरो की सूफ़ियाना शाइ’री - डॉक्टर सफ़्दर अ’ली बेग
जो इन्सान अपने आपको नहीं समझ सकता वो अपने पैदा करने वाले को कहाँ जान सकता
फ़रोग़-ए-उर्दू
सूफ़ी लेख
शैख़ सा’दी का तख़ल्लुस किस सा’द के नाम पर है ?
हमारी तहक़ीक़ में अगर शैख़ का तख़ल्लुस “सा’द के नाम से माख़ूज़ समझा जाये तो वो
एजाज़ हुसैन ख़ान
सूफ़ी साहित्य
रिसाला-ए-हक़-नुमा
फ़स्ल-ए-पंजुमहुवीयत-ए-रब-उल-अरबाब का बयान: जानना चाहीए कि जब सब कुछ वही है तो फिर तू कौन है
दारा शिकोह
सूफ़ी लेख
हज़रत शैख़ अ’लाउ’द्दीन क़ुरैशी-ग्वालियर में नवीं सदी हिज्री के शैख़-ए-तरीक़त और सिल्सिला-ए-चिश्तिया के बानी - सरदार रज़ा मुहम्मद
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन नख़्शबी
“सुनो-सुनो एक दफ़्आ’ मूसा अ’लैहिस्सलाम को हुक्म हुआ कि तुम्हारी क़ौमें जितनी नेक हैं उनको बुरों
सय्यद सबाहुद्दिन अब्दुल रहमान
सूफ़ी लेख
शाह नियाज़ बरैलवी ब-हैसिय्यत-ए-एक शाइ’र
एक मुहक़्क़िक़ हक़ायक़ को बे-नक़ाब करता है, एक रहबर उस को सरीउ’ल-फ़ह्म बनाता और अवाम तक