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ना'त-ओ-मनक़बत
तुम ही ख़ुदा के शेर हो शेर-ए-ख़ुदा 'अलीख़ैबर को फ़तह तुम ने ही तन्हा क्या 'अली
उवैस रज़ा अम्बर
ग़ज़ल
कामता प्रसाद होश
ना'त-ओ-मनक़बत
मुश्किल-कुशा शेर-ए-ख़ुदा मौला-'अली मौला-'अलीहैं जा-नशीन-ए-मुस्तफ़ा मौला-'अली मौला-'अली
अमीर बख़्श साबरी
ना'त-ओ-मनक़बत
सानी-ए-बद्रुद्दुजा शेर-ए-ख़ुदा कुछ और हैरम्ज़-ए-इल्लल्लाह में मुश्किल-कुशा कुछ और है
रियाज़ अहमद
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पद
अली वली है शेर ख़ुदा के हादी जिन्न-ओ-बशर के
अली वली है शेर ख़ुदा के हादी जिन्न-ओ-बशर केबाब मदीन:-ए-इल्म के हैं यो वसी हैं पैग़म्बर के
कवि दिलदार
ना'त-ओ-मनक़बत
अल्लाह अल्लाह रे जलाल हैबत-ए-शेर-ए-ख़ुदाकाँप उट्ठे अफ़्लाक सारे 'अर्श-ए-आ'ज़म हिल गया
अर्श गयावी
ना'त-ओ-मनक़बत
'अली महबूब-ए-नबी शेर-ए-ख़ुदा हक़ का वली'अली 'अली 'अली 'अली 'अली 'अली 'अली 'अली
मोहम्मद समी
सूफ़ी कहानी
एक गँवार का अंधेरे में शेर को खुजाना- दफ़्तर-ए-दोम
एक गँवार ने गाय तवेले में बाँधी, शेर और आया और गाय को खा पी वहीं
रूमी
सूफ़ी कहानी
एक ख़रगोश का शेर को मक्र से हलाक करना - दफ़्तर-ए-अव्वल
कलीला-ओ-दिमना से इस क़िस्से को पढ़ इस में से अपने हिस्से की नसीहत हासिल कर। कलीला-ओ-दिमना
रूमी
ना'त-ओ-मनक़बत
फ़िदा उस नाम पर क्या ख़ूब शेर-ए-यज़्दाँ हैबलाओं से रहे वो हिफ़्ज़ में जो तिफ़्ल-ए-नादाँ है



