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ना'त-ओ-मनक़बत
’आशिक़ान-ए-ज़ात-ए-हक़ का मुद्दआ' कलियर में हैग़ौस-ए-आ’ज़म का सजीला दिल-रुबा कलियर में है
पीर नसीरुद्दीन नसीर
सूफ़ी उद्धरण
बड़ी आरज़ुओं को तर्क कर दो, ताकि ग़मों से निजात मिल जाये।
बड़ी आरज़ुओं को तर्क कर दो, ताकि ग़मों से निजात मिल जाये।
मंसूर बिन अममार बसरी
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फ़ारसी कलाम
ऐ सर्व-ए-नाज़नीने ऐ तुर्क-ए-बे-नियाज़ेशोरे ज़दी ब-'आलम अज़ क़ामत-ए-दराज़े
पीर नसीरुद्दीन नसीर
ना'त-ओ-मनक़बत
मोहम्मद मुस्तफ़ा जिन को कि हक़ का मुद्द'आ कहिएनुबुव्वत की उन्हीं को इब्तिदा-ओ-इंतिहा कहिए
शाह हिलाल अहमद क़ादरी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
तर्क-ए-चश्म-ए-मख़्मूरश मस्त-ए-ना-तवानीहास्तफ़ित्न: बा निगाह-ए-ऊ गर्म-ए-हम अ'नानीहास्त
साएब तबरेज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
सफ़ीउल आलम शहबाज़ी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ब-क़ामत ख़ून-ए-आ'लम रेख़्ती पोशीद: पोशीद:क़यामत दामनत रा बोस: ज़द तर्सीद: तर्सीद:
ग़ुलाम इमाम शहीद
ना'त-ओ-मनक़बत
या हबीब-ए-किब्रिया इर्हम-लना इर्हम-लनाग़रक़-ए-'इस्याँ हूँ शहा उनज़ुर इला 'इस्यानिना
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
सलाम
या हुसैन इब्न-ए-'अली तेरी शहादत को सलामजज़्बा-ए-ईमान को शान-ए-’इबादत को सलाम
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
का’बा-ए-’आरिफ़ाँ क़िब्ला-ए-औलियाग़ौस-ए-आ’ज़म बिया ग़ौस-ए-आ’ज़म बिया
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
सरमाया गुनाहों का मिरे पास बहुत हैया-रब मुझे इस बात का एहसास बहुत है







