परिणाम "ameer khusro ebooks"
Tap the Advanced Search Filter button to refine your searches
अमीर ख़ुसरौ
1253 - 1325
अमीर ख़ुसरो
नेशनल अमीर ख़ुसरो सोसाइटी, नई दिल्ली
ख़ुसरौ काकोरवी
1883 - 1935
डॉ. शाह ख़ुसरौ हुसैनी
1945 - 2024
अमीर मीनाई
1829 - 1900
उमर वारसी
अमीर अली ख़ान
अमर पाल
अमीर बख़श साबरी
अमीर रफ़ी शाह अमीरुल्लाह
गोवर्धन प्रसाद अमीर
अमीर मोहम्मद सालेह
d.1534
अमीर हमज़ा निज़ामी
हलवाई और पायजामे में क्या निस्बत हैकंदा
कपड़े और दरिया में क्या निस्बत हैपाट
अँगरखे और पेड़ में क्या निस्बत हैकली
धूप लगे वो पैदा होय छाँव देख मुरझाएऐ री सखी मैं तुझ से पूछूँ हवा लगे मर जाए
डाला था सब को मन भाया टाँग उठा कर खेल बनायाकमर पकड़ के दिया ढकेल जब होवे वो पूरा खेल
बेहतरीन उर्दू शेर पढ़ें | हिन्दी शायरी एमपी3 शेर-ओ-शायरी शेर और दो लाइनों की शायरी हिंदी उर्दू और रोमन में सुनें। इस मशहूर शायरी को भी अपने दोस्तों के साथ शेयर भी करें।
रेख़्ता - उर्दू शायरी का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ संग्रह । प्रसिद्ध शायरों की सर्वश्रेष्ठ ग़ज़लें नज़्में एवं शेर ई-पुस्तक ऑडियों एवं वीडियो के साथ ।
Sufi Ameer Khusro
सय्यद सबाहुद्दीन अब्दुर्रहमान
1980सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Hayat-e-Hazrat Ameer Khusro
नक़ी मोहम्मद ख़ान ख़ूरजवी
1956जीवनी
Ameer Khusro
वहीद मिर्ज़ा
2006सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
शैख़ सलीम अहमद
1975सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Ameer Khusrau
सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Deewan-e-Kamil Ameer Khusro Dehlvi
1964शाइरी
अली अब्बास हुसैनी
1968सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
अमीर ख़ुसरो
सोहनपाल सुमनाछर
1990
Sufi Ameer Khusrau
1992जीवनी
Kulliyat-e-Hindavi Ameer Khusro
गोपी चंद नारंग
2017शाइरी
Hazrat Ameer Khusro Aur Tonk
शौकत अली ख़ान
1981जीवनी
Amir Khusrau
मौलाना फ़ख़रुद्दीन अहमद
Hazrat Ameer Khusro Ka Ilm-e-Mausiqi
रशीद मलिक
1975संगीत
Amir Khusrau Memorial Volume
अननोन ऑथर
1975
Ameer Khusru
1986सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
गोटे और आफ़्ताब में क्या निस्बत हैकिरन
मकान और अनाज में क्या निस्बत हैकंगनी
आना-जाना उस का भाएजिस घर जाए लकड़ी खाए
चालीस मन की नार रखावे सूखी जैसी तीलीकहने को पर्दे की बेली पर वो रंग-रंगीली
अपनी छवि बनाय के जो मैं पी के पास गईजब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई
दामन और अँगरखे में क्या निस्बत हैपर्दा
हाथ में लीजे देखा कीजै
श्याम बरन औ दाँत अनेक लचकत जैसी नारीदोनों हाथ से 'ख़ुसरव' खींचे और कहें तू आरी
दानाई से दाँत उस पे लगाता नहीं कोईसब उस को भुनाते हैं पे खाता नहीं कोई
नई की ढीली पुरानी की तंगबूझो तो बूझो नहीं चलो मेरे संग
बंदूक़ और कुएँ में क्या निस्बत हैकोठी
मिला रहे तो नर रहे अलग होय तो नारसोने का सा रंग है कोई चतेरा करे विचार
आगे आगे बहिना आई पीछे पीछे भइयादाँत निकारे बाबा आये बुर्क़ा ओढ़े मइया
एक तरुवर का फल है तर पहले नारी पीछे नरवा फल की ये देखो चाल बाहर खाल औ भीतर बाल
बादशाह और मुर्ग़े में क्या निस्बत हैताज
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
Urdu poetry, urdu shayari, shayari in urdu, poetry in urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books