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ना'त-ओ-मनक़बत
तुम्हारी ज़ात है वो पाक ज़ात या-वारिसकि जिस में सब हैं ख़ुदा की सिफ़ात या-वारिस
एजाज़ वारसी
सूफ़ी लेख
क़व्वाली ग्यारहवीं शरीफ़ और हज़रत ग़ौस पाक के चिल्लों पर
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के चिल्लों पर क़व्वाली के रिवाज और उसकी मक़्बूलियत के बाद हिन्दोस्तान में
अकमल हैदराबादी
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सूफ़ी कहावत
आन रा कि हिसाब पाक अस्त अज़ मुहास्बा चे: बाक अस्त
जिसके हिसाब-किताब साफ़ हैं, उसे क्यों डरना
वाचिक परंपरा
सूफ़ी कहावत
दिल कि पाक अस्त, ज़ुबां बेबाक अस्त।
जब किसी की आत्मा शुद्ध होती है, तो उसकी ज़ुबां भयरहित होती है।
वाचिक परंपरा
ना'त-ओ-मनक़बत
मोरे प्यारे मोहम्मद प्यारे नबी मुझे पाक जमाल दिखाओ जीमोहे बिरह अगन ने फूक दिया अब इतना न तरसाओ जी
नियाज़ वज़ीराबादी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
'अक़्ल 'आजिज़ शुद ज़ इदराक-ए-मक़ाम-ए-ग़ौस-ए-पाकहब्बज़ा फ़ज़्ल-ओ-’उलूम-ओ-एहतिशाम-ए-ग़ौस-ए-पाक
शाह अब्दुल क़ादिर बदायूँनी
ना'त-ओ-मनक़बत
अनवार बरसते हैं उस पाक नगर की राहों मेंइक कैफ़ का 'आलम होता है तैबा की मस्त हवाओं में
वासिफ़ अली वासिफ़
ना'त-ओ-मनक़बत
अ'ब्दुल सत्तार नियाज़ी
सूफ़ी उद्धरण
पाक वो नहीं हैं, जो अपना जिस्म धो कर बैठ जाते हैं। पाक वो हैं कि जिन के अन्दर ख़ुदा रहता है।
पाक वो नहीं हैं, जो अपना जिस्म धो कर बैठ जाते हैं। पाक वो हैं कि जिन के अन्दर ख़ुदा रहता है।
गुरु नानक
सूफ़ी उद्धरण
क़िल्लत-ए-तआम
कम खाना, मन पर क़ाबू पाने और आत्मिक उन्नति के लिए खाने में सादगी और संयम अपनाना।







