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सूफ़ी लेख
रैदास और सहजोबाई की बानी में उपलब्ध रूढ़ियाँ- श्री रमेश चन्द्र दुबे- Ank-2, 1956
(2) पिंड परे जिव जिस घर जाता। सबद अतीत अनाहद राता।।
भारतीय साहित्य पत्रिका
फ़ारसी कलाम
ऐ ग़नी ज़ात-ए-तू अज़ इक़रार-ओ-अज़ इंकार-ए-माबे-नियाज़ अज़ मा-ओ-अज़ पैदाई-ओ-इज़्हार-ए-मा
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
पिया तुझ आश्ना हूँ मैं तू बे-गाना न कर मुझ कोटले न इक घड़ी तुझ याद बिन तू ना-बिसर मुझ को
कुली कुतुब शाह
ग़ज़ल
ग़नी है दिल दो-आलम से फ़राग़त उस को कहते हैंहै याद-ए-हक़ फ़क़त दिल में क़नाअत उस को कहते हैं
मर्दान सफ़ी
दोहा
रहिमन सो न कछू गनै जासों लागे नैन
रहिमन सो न कछू गनै जासों लागे नैनसहि के सोच बेसाहियो गयो हाथ को चैन
रहीम
पद
अपनी विरह-कथा - मेरे उठी कलेजे पीर घनी
मेरे उठी कलेजे पीर घनी मेरे उठी कलेजे पीर घनीबिन दरसन जियरा नित तरसे चरन ओर रहे दृष्टि तनी
शालीग्राम
सूफ़ी कहानी
कहानी -2-ज़िन्दगी- गुलिस्तान-ए-सा’दी
दुनिया में दो तरह के आदमी बे-कार तकलीफ़ उठाते हैं। एक तो वे, जो कमाते हैं
सादी शीराज़ी
कवित्त
बकि 2 अली तुम खाली न मगज करौ
बकि बकि अली तुम खाली न मगज करौखैहोनतु गाली मेरी टेव बलिहारी है।
सय्यद छेदाशाह
शबद
थोडा मिलना सुख घना मन में रहै हुलास
थोडा मिलना सुख घना मन में रहै हुलासबहुत मेल मिलाप से होय प्रीत का नास
ईश्वरदास
सलोक
फ़रीदा सुता है ताँ जाग घना सवसीं गोर महं
फ़रीदा सुता है ताँ जाग घना सवसीं गोर महंबिन अ'मलाँ सोहाग गलीं रब्ब ना पाईअह
बाबा फ़रीद
कविता
अन्त की याद- मकड़ी जाला पूर 2 के कितने जीव सताती है।
मकड़ी जाला पूर पूर के कितने जीव सताती है।मक्खी मच्छड़ एक न छोड़े भुनगे तक को खाती है।।टेक।।
हकीम हाजी अली ख़ान
सूफ़ी लेख
खुसरो की हिंदी कविता - बाबू ब्रजरत्नदास, काशी
सदा रखिए लाल गुलाल हज़रत....(2)

