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ग़ज़ल
हिकमत से ये ख़ाली नहीं लबरेज़ साक़ी जाम करदौर-ओ-तसलसुल में न फँस दीवानगी में नाम कर
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
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सूफ़ी उद्धरण
जो काम हिकमत से ख़ाली है, वो आफ़त है। जो ख़ामोशी हिकमत से ख़ाली है, वो ग़फ़लत है। जो नज़र हिकमत से ख़ाली है, वो ज़िल्लत है।
राबिया बसरी
शे'र
ब-रोज़-ए-हश्र हाकिम क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा होगाफ़रिश्तों के लिखे और शैख़ की बातों से क्या होगा
हरी चंद अख़्तर
पद
हाकिम हो कर ज़ुल्म न करना हरगिज़ ख़ल्क़-ए-ख़ुदा पर
हाकिम हो कर ज़ुल्म न करना हरगिज़ ख़ल्क़-ए-ख़ुदा परवरनहौं इस का बदला होगा तुमसे रोज़-ए-जज़ा पर
कवि दिलदार
सूफ़ी उद्धरण
अपने क़ल्ब को नसीहत की तवानाई दो, उसे हिकमत से रौशन करो और लोगों से बेनियाज़ हो कर उसे ताक़त पहुँचाओ।
अपने क़ल्ब को नसीहत की तवानाई दो, उसे हिकमत से रौशन करो और लोगों से बेनियाज़ हो कर उसे ताक़त पहुँचाओ।
हज़रत अली
सलोक
फ़रीदा करन हकूमत दुनी दी हाकम नाउ धरन्न
फ़रीदा करन हकूमत दुनी दी हाकम नाउ धरन्नअगे धाउल प्याद्यां पिछे कोत चलन्न
बाबा फ़रीद
सूफ़ी उद्धरण
हिकमत एक दरख़्त है, जो दिल में उगता है, दिमाग़ में पलता है और ज़बान पर फल देता है।
हिकमत एक दरख़्त है, जो दिल में उगता है, दिमाग़ में पलता है और ज़बान पर फल देता है।
हज़रत अली
सलाम
हो गया जिस से दरख़्शाँ बातिन-ए-इंसानियतआप के नूर-ए-फ़रोग़-ए-'इल्म-ओ-हिक्मत को सलाम
अब्दुल अज़ीज़ दब्बाग़
सूफ़ी उद्धरण
हिकमत, इल्म और फ़िक्र से हासिल होती है।
हिकमत, इल्म और फ़िक्र से हासिल होती है।