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आ’शिक़
आशिक़
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सूफ़ी लेख
ज़िक्र-ए-ख़ैर ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़
ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़ एक महान सूफ़ी शा’इर हुए हैं। अगर उनकी ज़िंदगी और शाइरी पर नज़र
रय्यान अबुलउलाई
ग़ज़ल
वफ़ा का ज़िक्र उल्फ़त का चलन छोड़ा नहीं जाताकिसी आ'लम में भी ये बाँकपन छोड़ा नहीं जाता
जुर्म मुहम्मदाबादी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
बर जमालत हम-चुनाँ मन आशिक़-ए-ज़ारम हुनूज़नालःए कज़ सोज़-ए-इश्क़त दाश्तम दारम हुनूज़
अमीर ख़ुसरौ
ग़ज़ल
ये जो लगा है तीर मुझे ऐ कमान-ए-इश्क़महशर में देखियो यही होगा निशान-ए-इश्क़

