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ना'त-ओ-मनक़बत
किस कैफ़ में डूबे हैं दीवाने मोहम्मद केपी पी के जिए जाते हैं मस्ताने मोहम्मद के
अमीर बख़्श साबरी
सलाम
जिस तरह हैं बुज़ुर्ग मोहम्मद ख़ुदा के बा'दयूँही बुज़ुर्ग-तर हैं 'अली मुस्तफ़ा के बा'द
वहीद अशरफ़ वारसी
सेहरा
मोहम्मद का करम अल्लाह की रहमत बन गया सेहराबुज़ुर्गों की दु’आ से वज्ह-ए-राहत बन गया सेहरा
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
पद
रामानन्द के दास कबीरा नामदेव भक्तन में शूरा
रामानन्द के दास कबीरा नामदेव भक्तन में शूराकलियुग में नीसान बजाया निराकार का पंथ चलाया
भाऊदास जी
ना'त-ओ-मनक़बत
हैदर की आँखों के तारे ग़ौस मोहम्मद यूसुफ़ शाहज़हरा के प्यारों के प्यारे ग़ौस मोहम्मद यूसुफ़ शाह
ज़हीन शाह ताजी
ना'त-ओ-मनक़बत
ख़लील सफ़ीपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
यहाँ मोहम्मद वहाँ मोहम्मद इधर मोहम्मद उधर मोहम्मदजहाँ भी देखा निगाह-ए-दिल ने वहीं पे आए नज़र मोहम्मद
नसीर सिराजी
शबद
शूरा ताही जानिये लड़े धनी के हेत
शूरा ताही जानिये लड़े धनी के हेतपुरजा पुरजा होय पड़े तहूँ न छाड़े खेत
लालदास
ना'त-ओ-मनक़बत
मेरे पीर शहबाज़ मोहम्मद सब की आँखों के तारेवली के जानी 'अली के दिलबर नबी के राज-दुलारे
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
मोहम्मद के जो कूचा में गुज़र होता तो क्या होतामदीना में अगर मेरा भी घर होता तो क्या होता
महमूद शाह नक़्शबंदी
ना'त-ओ-मनक़बत
पर्दा उठा मोहम्मद के रुख़ से हो गया दो-जहाँ में उजालाज़र्रे-ज़र्रे से आवाज़ आई आ गया आ गया कमली वाला