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मुख़म्मस
तिरे 'आशिक़ पे जो गुज़रे है कब इज़हार करता हैकोई पूछे है कुछ उस से तो ठंडी साँस भरता है
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
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ना'त-ओ-मनक़बत
वफ़ा का बाब-ए-अबद तक पढ़ा गए हैं हुसैनबचा के दीन को सब घर लुटा गए हैं हुसैन
आबिद अली अत्तारी
ना'त-ओ-मनक़बत
हाफ़िज़ हबीब अ'ली शाह
शे'र
ब-रोज़-ए-हश्र हाकिम क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा होगाफ़रिश्तों के लिखे और शैख़ की बातों से क्या होगा
हरी चंद अख़्तर
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
'आशिक़ शुदम 'आशिक़ शुदम दर कू-ए-जानाँ मी-रवमदिल दाद:-अम दिल दाद:-अम अंदर पय-ए-आँ मी-रवम
रूमी
फ़ारसी कलाम
कुन पाक ज़ दस्त-ए-ख़ुद अश्क अज़ मिझ:-ए-'आशिक़गर दस्त देहद फ़ुर्सत अज़ मिक़्ना'-ए-पैराई
मिर्ज़ा मुहम्मद हुसैन क़तील
ना'त-ओ-मनक़बत
चराग़-ए-बज़्म-ए-शरीअ'त हुसैन ज़िंदाबादज़िया-ए-बज़्म-ए-तरीक़त हुसैन ज़िंदाबाद
तुफ़ैल अहमद मिस्बाही
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
वश्शमस चे बाशद सिफ़त-ए-वज्ह-ए-शरीफ़शवल्लैल चे बाशद सिफ़त-ए-मू-ए-मोहम्मद
अमीर हसन अला सिज्ज़ी
फ़ारसी कलाम
हुसैन सय्यद-ए-अहल-ए-जिनाँ सलाम-'अलैकामलीक-ए-मु्ल्क-ए-विलायत-निशाँ सलाम-'अलैका