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कलाम
याद थीं हम को भी रंगा-रंग बज़्म-आराईयाँलेकिन अब नक़्श-ओ-निगार-ए-ताक़-ए-निस्याँ हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ बाद-ए-मुश्क-बू ब-गुज़र सू-ए-आँ-निगारब-कुशा गिरह ज़े-ज़ुल्फ़श व बू-ए-ब-मन बयार
हाफ़िज़
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
हर नक़्श रा कि दीदी जिन्स-अश ज़े-ला-मकानस्तगर नक़्श रफ़्त ग़म नीस्त अस्लश चु जावेदानस्त
रूमी
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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ दस्तत अज़ निगार सफेद-ओ-स्याह-ओ-सुर्ख़वे चश्मत अज़ ख़ुमार सफ़ेद-ओ-स्याह-ओ-सुर्ख़
अमीर ख़ुसरौ
ग़ज़ल
ऐ ख़ास-ए-महबूब-ए-ख़ुदा ब-निगर सू-ए-अहवाल-ए-मनब-निगर ब-चश्म-ए-लुत्फ़-ए-ख़ुद ब-निगर सू-ए-अफ़’आल-ए-मन
अशरफ़ हुसैन अशरफ़ी
शे'र
शाह नसीर
शे'र
शाह नसीर
शे'र
शाह नसीर
कलाम
ऐ जान-ए-जहाँ कब तक ये गोशा-ए-तन्हाईसब दीद के तालिब हैं जितने हैं तमाशाई
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
शे'र
जला हूँ आतिश-ए-फ़ुर्क़त से मैं ऐ शोअ'ला-रू याँ तकचराग़-ए-ख़ाना मुझ को देख कर हर शाम जलता है

