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सूफ़ी लेख
क़व्वाली का अहद-ए-ईजाद और समाजी पस-ए-मंज़र
मूजिद-ए-क़व्वाली हज़रत अमीर ख़ुसरो का ‘अह्द इब्तिदा-ए-इस्लाम और मौजूदा ‘अह्द के ठीक दरमियान का ‘अह्द है
अकमल हैदराबादी
ग़ज़ल
मख़दूम ख़ादिम सफ़ी
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ग़ज़ल
मज़ा है ज़िंदगानी का अगर हो पास दिलबर केनिकल कर वहम-ए-हस्ती से गुज़र हो पास दिलबर के
मीराँ शाह जालंधरी
ग़ज़ल
जा-ब-जा तुम बैठने उठने लगे जिस-तिस के पासकौन कहता है कहाँ किस वक़्त किस दिन किस के पास
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
साखी
बिरह का अंग - कै आबै पिय आपही कै मोहिं पास बुलाय
कै आबै पिय आपही कै मोहिं पास बुलायआय सकों नहिं तोहिं पै सकों न तुज्झ बुलाय






