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कलाम
आख़िर ख़ुदा-ए-बे-निशाँ आया नज़र सिफ़ात मेंसुनते तो थे अज़ल से ही देखा किसी की ज़ात में
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
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बुलबुल सिफ़त ऐ गुल-बदन इस बाग़ में हर सुब्हतेरी बहारिस्तान का दीवाना हूँ दीवाना हूँ
क़ादिर बख़्श बेदिल
ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ मेहर-ए-चर्ख़-ए-बरतरी पीरान-ए-साबिर कलियरीऐ नूर-ए-बुर्ज-ए-ख़ावरी पीरान-ए-साबिर कलियरी
सीमाब अकबराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ सौर की रातों की ज़िया अहमद-ए-मुख़्तारऐ सुब्ह-ए-दरख़्शान-ए-हिरा अहमद-ए-मुख़्तार
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
अज़्म-ए-फ़रियाद! उन्हें ऐ दिल-ए-नाशाद नहींमस्लक-ए-अहल-ए-वफ़ा ज़ब्त है फ़रियाद नहीं
सीमाब अकबराबादी
कलाम
गुरु दर्शन भगवान का दर्शन सिफ़त में ज़ात समाई रेगुरु बिन ज्ञान नहीं भई साधो गुरु ने बात बताई रे
मीराँ भीख
कलाम
सभी ज़ात सिफ़ात से हो निर्मल जब साधू सुन माँह ध्यान धरेसुमर सुमर सिमरन से परे नारायण हरे नारायण हरे
मीराँ भीख
कलाम
मौसूफ़ सिफ़त में पिन्हाँ है तन्क़ीद गवारा कैसे होहै दीद-ए-बुताँ दीदार-ए-ख़ुदा इंकार का यारा कैसे हो









