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कलाम
बे-अदबाँ न सार अदब दी गए अदब थीं वांजे हूजेहड़े होण मिट्टी दे भांडे कदी न थीवण कांजे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
करते हैं बे-दहान-ओ-ज़बाँ गुफ़्तुगू वो 'फ़ैज़'ऐसा कलाम हम ने किसी का सुना नहीं
मीर शम्सुद्दीन फ़ैज़
सूफ़ी उद्धरण
ख़ुदा की बारगाह का अदब हर हाल में मल्हूज़ रखना चाहिए।
ख़ुदा की बारगाह का अदब हर हाल में मल्हूज़ रखना चाहिए।
दाता साहिब
ना'त-ओ-मनक़बत
ब-फ़ैज़-ए-हज़रत-ए-पीरान-ए-पीर-ओ-आल-ए-’अबातुम्हारे साए में है घर का घर ग़रीब-नवाज़