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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
आमद बहार ऐ यार-ए-मन ब-शगुफ़्त गुलहा दर चमनशुद दर नवा हर बुलबुले बर शाख़-ए-सर्व-ओ-नारवन
अमीर ख़ुसरौ
कलाम
क़मर जलालवी
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ग़ज़ल
चमन की सर-ज़मीं देखी न रंग-ए-गुलिस्ताँ मैं नेक़फ़स से तब्दीलियाँ लेकर बनाया आशियाँ मैं ने
सूफ़ी तबस्सुम
कलाम
आक़िल रेवाड़वी
शे'र
सिराज औरंगाबादी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
सुब्ह-दम मुर्ग़-ए-चमन बा-गुल-ए-नौ-ख़ास्तः गुफ़्तनाज़ कम कुन कि दर ईं बाग़ बसे चूँ तू शगुफ़्त
हाफ़िज़
ग़ज़ल
जो वो बहार-ए-अज़ार-ए-ख़ूबी चमन में आता ख़िराम करतासनोबर-ओ-सर्व हर एक आ कर ज़रूर उस को सलाम करता


