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सूफ़ी उद्धरण
‘‘मुरीदी’’ वह चीज़ है जो ब-वक़्त-ए-अज़ीम यानी मरते वक़्त काम आती है।
‘‘मुरीदी’’ वह चीज़ है जो ब-वक़्त-ए-अज़ीम यानी मरते वक़्त काम आती है।
मख़दूम ख़ादिम सफ़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
औज-ए-विलायत के हो माह तख़्त-ए-ख़िलाफ़त के हो शाहदीन-ए-मोहम्मद की पनाह ऐ बादशाह-ए-अस्फ़िया
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
अनवार-ए-जमाल-ए-तुस्त दर दीदः-ए-हर-मोमिनदस्तार-ए-जलाल-ए-तुस्त दर सीनः-ए-हर-काफ़िर
शम्स मग़रिबी
सलाम
वाली-ए-मंज़ूर-ए-वाला जाह-ए-मौला-ए-जहाँऐ वली-ए-इब्न-ए-वली शाह-ए-विलायत अस्सलाम
अब्दुल माजिद बदायूँनी
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सलाम
राकिब-ए-दोश-ए-मोहम्मद वारिस-ए-शेर-ए-ख़ुदाअस्सलाम ऐ नुत्क़-ए-फ़ुरक़ाँ मग़्ज़-ए-क़ुरआँ अस्सलाम
ख़ालिद नदीम बदायूँनी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
बर सफ़्हः-ए-रुख़्सार-ए-हर-माह-ए-परी-रूएहर्फ़े दो सेह अज़ दफ़्तर-ए-हुसनत शुद: मक्तूब
शम्स मग़रिबी
सलाम
सलाम ऐ मतला’-ए-अनवार ऐ माह-ए-शब-ए-असरासलाम ऐ मुस्तफ़ा शम’-ए-हरीम-ए-बज़्म-ए-सुबहानी
ज़िया-उल-क़ादरी बदायूँनी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
हर-लहज़: रुख़त दाद जमाल-ए-रुख़-ए-ख़ुद राबर दीद:-ए-ख़ुद जल्वः ब-सद किस्वत-ए-ज़ेबा
शम्स मग़रिबी
सलाम
सलाम ऐ मज़हर-ए-ज़ात-ओ-सिफ़ात-ए-हज़रत-ए-यज़्दाँसलाम ऐ बा’इस-ए-वासिल ज़ुहूर-ए-’आलम-ए-इमकाँ
जामी बदायूँनी
कलाम
तरब आश्ना-ए-ख़रोश हो तू नवा है महरम-ए-गोश होवो सरोद क्या कि छुपा हुआ हो सुकूत-ए-पर्दा-ए-साज़ में
अल्लामा इक़बाल
कलाम
अख़्तर शीरानी
ना'त-ओ-मनक़बत
सख़ा-ए-ख़्वाजा-ए-ख़ानून का है तज़्किरा घर-घरकोई ख़ाली नहीं जाता है इस दरबार में आकर