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ग़ज़ल
तुम ही तो वज्ह-ए-ज़िंदगी तुम ही तो मक़्सद-ए-हयातजान-ए-जहान-ए-आरज़ू रूह-ए-रवान-ए-काएनात
कामिल शत्तारी
ना'त-ओ-मनक़बत
नईम फ़िरोज़बादी
कलाम
मिरे मा'शूक़ तुम हो यार तुम हो दिल-बरा तुम होये सब कुछ हो मगर मैं कह नहीं सकता कि क्या तुम हो
मुज़तर ख़ैराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
जमाल-ए-सुब्ह-ए-अज़ल वज्ह-ए-कुन-फ़काँ तुम होहरीम-ए-साहिब-ए-फ़ितरत के राज़-दाँ तुम हो
कलीम उस्मानी
ना'त-ओ-मनक़बत
हाफ़िज़ुल्लाह साबरी
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ना'त-ओ-मनक़बत
ख़्वाजा नाज़िर निज़ामी
ग़ज़ल
रूह-ए-रवाँ नग़्मा तुम नग़्मों का सोज़ साज़ मेंजान-ए-ख़याल-ओ-ख़्वाब तुम जान-ए-जहान-ए-नाज़ में
बहज़ाद लखनवी
ग़ज़ल
मेरे महबूब तुम हो यार तुम हो दिल-रुबा तुम होये सब कुछ हो मगर मैं कह नहीं सकता कि क्या तुम हो
मुज़तर ख़ैराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
निशात मुरादाबादी
शे'र
तुम अपनी ज़ुल्फ़ खोलो फिर दिल-ए-पुर-दाग़ चमकेगाअंधेरा हो तो कुछ कुछ शम्अ' की आँखों में नूर आए
मुज़तर ख़ैराबादी
कलाम
जहाँ के राज़-दाँ तुम हो जहाँ का राज़-दाँ मैं हूँजहाँ वो है जहाँ तुम हो जहाँ वो है जहाँ मैं हूँ
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
या-नबी नूर हो तुम जल्वा-ए-यज़्दाँ की क़समजैसे तुम हो नहीं ऐसा कोई ईमाँ की क़सम
फ़ना बुलंदशहरी
ना'त-ओ-मनक़बत
ख़्वाजा जी महाराजा जी तुम बड़ो ग़रीब नवाज़अपना कर के राखियो तोहे बाँह पकड़े की लाज
