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साखी
सूक्ष्म का अंग - हम चाले अमरावती टारे टूरे टाट
हम चाले अमरावती टारे टूरे टाटआवन होय तो आइयो सूली ऊपर बाट
कबीर
दोहा
बैराग का अंग - तात मात तुम्हरे गये तुम भी भये तयार
तात मात तुम्हरे गये तुम भी भये तयारआज काल्ह में तुम चलौ 'दया' होहु हुसियार
दया बाई
ना'त-ओ-मनक़बत
वक़्फ़ थे क़ुदसी-ए-अज़ल से जिन की ता’अत के लिएआए वो दुनिया में दुनिया की हिदायत के लिए
शकील बदायूँनी
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मसनवी
हिकायत-ए-मर्द-ए-बक़्क़ाल-ओ-तूती-ओ-रोग़न रेख़्तन-ए-तूती दर दुक्कानबूद बक़्क़ाले-ओ-वै रा तूतिए
रूमी
साखी
प्रेम का अंग - ये तत्त वो तत्त एक है एक प्रान दुइ गात
ये तत्त वो तत्त एक है एक प्रान दुइ गातअपने जय से जानिये मेरे जिय की बात
कबीर
अरिल्ल
अरिल छंद - रहति भयो घर नारी तत मन थीरा
रहति भयो घर नारी तत मन थीराब्रह्म भयो तब जीव गयो तब पीरा
गुलाल साहब
दोहा
परि कटारी विरह की टूट रही उर साल
परि कटारी विरह की टूट रही उर सालमूएँ पीछैं जो मिलौ जीयत मिलौ 'जमाल'
जमाल
दोहा
भेद की रहनी - 'गुलाल' ताखी तत्त दियो प्रेम सेल्हि हिये नाय
गुलाल ताखी तत्त दियो प्रेम सेल्हि हिये नायसुमिरिनी मन महँ फिरयो आठ पहर लौ लाय
गुलाल साहब
शे'र
क्या ग़म जो टूट जाएँ जिगर, जाँ, कलेजा, दिलपर तेरी चाह की न तमन्ना शिकस्त हो
सुलेमान शिकोह गार्डनर
दोहा
उपदेश गुरू भक्ति का - ये आपा तुम कूँ दिया जित चाहौ तित राखि
ये आपा तुम कूँ दिया जित चाहौ तित राखि'चरनदास' द्वारे परो भावै झिड़कौ लाखि
चरनदास जी
दोहा
इंद्रियों का बर्णन - जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जात
जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जातबुधि भी संगहि जात है ये निस्चय करि बात