आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tazkira muslim mashaheer vaishali volume 001 mohammad sanaul huda qasmi ebooks"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "tazkira muslim mashaheer vaishali volume 001 mohammad sanaul huda qasmi ebooks"
ना'त-ओ-मनक़बत
फिर 'नियाज़ी' की भी हो जाए मदीने हाज़िरीदोस्तो करना नबी से यूँ मोहम्मद का तज़्किरा
अ'ब्दुल सत्तार नियाज़ी
अन्य परिणाम "tazkira muslim mashaheer vaishali volume 001 mohammad sanaul huda qasmi ebooks"
ना'त-ओ-मनक़बत
सख़ा-ए-ख़्वाजा-ए-ख़ानून का है तज़्किरा घर-घरकोई ख़ाली नहीं जाता है इस दरबार में आकर
ख़्वाजा नाज़िर निज़ामी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुस्लिम है जहाँ में रुतबा-ए-आ’ली क़तादा काशुजाअ'त में नहीं मिलता कोई सानी क़तादा का
वासिफ़ रज़ा वासिफ़
सूफ़ी लेख
तज़्किरा यूसुफ़ आज़ाद क़व्वाल
इस्माई’ल आज़ाद के हम-अ’स्रों में सबसे ज़्यादा शोहरत यूसुफ़ आज़ाद को नसीब हुई। यूसुफ़ एक इंतिहाई
अकमल हैदराबादी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा इस्माई’ल आज़ाद क़व्वाल
ग्यारहवीं सदी ईसवी से मौजूदा बीसवीं सदी तक क़व्वाली ने कई मंज़िलें तय कीं लेकिन ये
अकमल हैदराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुज़्तरिब हूँ कर रहा हूँ तज़्किरा 'अब्बास कानाम लब पर आ रहा है बारहा 'अब्बास का
सक़लैन अहमद जाफ़री
ग़ज़ल
रहा करता है अक्सर तज़्किरा बर्बादी-ए-दिल कामैं बिगड़ा हूँ तो अफ़्साना बना हूँ उन की महफ़िल का
अफ़सर सिद्दीक़ी अमरोहवी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा जानी बाबू क़व्वाल
जानी बाबू एक सुरीली, मीठी और पुर-कशिश आवाज़ के मालिक हैं। उनकी तबीअ’त में मूसीक़ी ऐसे