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ना'त-ओ-मनक़बत
तुम्हारी ज़ात है वो पाक ज़ात या-वारिसकि जिस में सब हैं ख़ुदा की सिफ़ात या-वारिस
एजाज़ वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
जज़्ब है ताबिश-ए-नज़र ख़त्म-ए-रुसुल की ज़ात मेंआई जो बन के शम-ए’-हक़ अंजुमन-ए-हयात में
शकील बदायूँनी
सूफ़ी उद्धरण
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
तुलसीदास ब्रजवासी
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ना'त-ओ-मनक़बत
मा'बूद है तू ज़ात तेरी लम-यज़ल की है'आबिद तिरा हर एक नबी और वली है
मोहम्मद इब्राहीम सिद्दीक़ी
कलाम
गुरु दर्शन भगवान का दर्शन सिफ़त में ज़ात समाई रेगुरु बिन ज्ञान नहीं भई साधो गुरु ने बात बताई रे
मीराँ भीख
कलाम
सभी ज़ात सिफ़ात से हो निर्मल जब साधू सुन माँह ध्यान धरेसुमर सुमर सिमरन से परे नारायण हरे नारायण हरे
मीराँ भीख
कलाम
ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद
फ़ारसी कलाम
तु ऐ’न-ए-मोहम्मदी ब-जान-ए-तू क़समगुम ज़ात-ओ-सिफ़ात-ए-तुस्त दर ज़ात-ए-नबी
हकीम शोएब फुलवारवी
फ़ारसी कलाम
ज़ुहूर-ए-कामिल-ए-ज़ात-ओ-सिफ़ात-ए-हज़रत-ए-यज़्दाँहबीबी सय्यदी महबूब-ए-ख़ासुल-ख़ास-ए-रब्बाने
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
आख़िर ख़ुदा-ए-बे-निशाँ आया नज़र सिफ़ात मेंसुनते तो थे अज़ल से ही देखा किसी की ज़ात में
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
कलाम
हस्ती-ओ-ज़ात-ओ-सिफ़ात-ओ-हस्त की मा'नी है इक'अब्द-ओ-रब के दरमियाँ कब है जुदाई का घमंड