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ना'त-ओ-मनक़बत
ख़्वाजा जी महाराजा जी तुम बड़ो ग़रीब नवाज़अपना कर के राखियो तोहे बाँह पकड़े की लाज
अज्ञात
क़िता'
नहीं वो ज़िक्र कि हज़रत जी सुब्ह-ओ-शाम कियान मय-परस्तों की सोहबत जौ भर के जाम पिया
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
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ना'त-ओ-मनक़बत
दिलों पे देख लो क़ब्ज़ा मिरे शाह जी मियाँ का हैहर इक सू चल रहा सिक्का मिरे शाह जी मियाँ का है
अर्श पूरनपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
हरे झंडे के शहज़ादे जी मेरे पीर दस्तगीरहरे झंडे के शहज़ादे जी मेरे पीर दस्तगीर
वक़ारुद्दीन सिद्दीक़ी
दोहा
गणपति-स्तुति- गणपति गण सिरताज हौ, तुम्हें नमाऊँ शीश।
गणपति गण सिरताज हौ, तुम्हें नमाऊँ शीश।ज्ञान देव पूरण हमें जानेगे सुत ईश।।
ताज जी
छप्पय
गणपति-स्तुति- सब गन को सरदार जगत अति तोको माने।
सब गन को सरदार जगत अति तोको माने।होत जहॉ उत्साह आदि सब सरस बखाने।।
ताज जी
मंगलाचरण
।। वृहन्नवणम् ।।
ओं विष्णु विष्णु तू भण रे प्राणी, साधे भक्ति ऊधरणों,दिवला सों दानों दाशति दानों, मदसुदानों महमाणों
जम्भेश्वर
कवित्त
भक्तोद्गार- छैल जो छबीला सब रंग में रंगीला
छैल जो छबीला सब रंग में रंगीला,बड़ा चित्त का अड़ीला कहूँ देवतों से न्यारा है।
ताज जी
कवित्त
भक्तोद्गार- काहू को भरोसो बद्रीनाथ जाय पाँय परे
काहू को भरोसो बद्रीनाथ जाय पाँय परे,काहू को भरोसो जगन्नाथ जू के भात को।
ताज जी
कवित्त
भक्तोद्गार- सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी
सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानीतुम दस्त ही बिकानी बदनामी भी सहूँगी मैं
ताज जी
कवित्त
भक्तोद्गार- कोई जन सेवै शाह राजा राव ठाकुर को
कोई जन सेवै शाह राजा राव ठाकुर कोकोई जन सेवै भैरो भूप काज सार हैं।
ताज जी
कवित्त
भक्तोद्गार- पूरब ले जनम कमाई जिन खूब करी
पूरब ले जनम कमाई जिन खूब करीपाय तन दीन 'ताज' सुनी बेद बानी है।



