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सूफ़ी लेख
पीर नसीरुद्दीन ‘नसीर’ महद से लहद तक
पीर ‘नसीर’ एक शानदार मुक़र्रिर (वक्ता) थे। वो घंटों तक बोलते रहते और हज़ारों लोगों का
रय्यान अबुलउलाई
सूफ़ी लेख
समा के आदाब-ओ-मवाने से का इनहराफ़
हज़रत जुनैद ने रि’आयत-ए-मकान की तस्रीह ये की है कि ''मकान से मुराद ये कि जिस
अकमल हैदराबादी
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तज़्किरा जानी बाबू क़व्वाल
जानी एक ज़हीन और रौशन ख़याल फ़नकार हैं।उन्होंने क़व्वालों की आम रविश से हट कर आला
अकमल हैदराबादी
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क़व्वाली का ‘अह्द-ए-ईजाद और मक़्सद-ए-ईजाद
क़व्वाली की ईजाद अमीर ख़ुसरो के ‘अह्द-ए-हयात 1253 ता 1325 के ठीक दरमियान का ‘अह्द है,
अकमल हैदराबादी
सूफ़ी लेख
जदीद क़व्वाली और मूसीक़ी
पहले तो क़व्वाली की धुनें बहुत मख़्सूस और महदूद थीं, इन्हीं धुनों में कलाम के रद्द-ओ-बदल