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सूफ़ी लेख
अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की पाँचवी क़िस्त
जिनकी भगवान् के साथ कुछ भी प्रीति नहीं है और जो सर्वदा मायिक पदार्थों में ही
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
ख़्वाजा गेसू दराज़ बंदा-नवाज़ - प्रोफ़ेसर सय्यद मुबारकुद्दीन रिफ़्अ’त
इस किताब में एक जगह इर्शाद फ़रमाते हैं कि जब मोमिन नफ़्स के पंजे से छुटकारा
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
वेदान्त
हक़ीक़ी नजात फ़ना-ए-कामिल के बग़ैर मुमकिन नहीं है क्यूँकि अगर वक़्ती तौर पर कोई दुख दूर
मयकश अकबराबादी
सूफ़ी लेख
बक़ा-ए-इंसानियत के सिलसिला में सूफ़िया का तरीक़ा-ए-कार- मौलाना जलालुद्दीन अ’ब्दुल मतीन फ़िरंगी महल्ली
हाकिम(यूसुफ़ अलैहिस्सलाम)ने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि चोरी करे कोई पकड़ा जाए कोई।ये
मुनादी
सूफ़ी लेख
हज़रत शरफ़ुद्दीन अहमद मनेरी रहमतुल्लाह अ’लैह
“ऐ अ’ज़ीज़ ये बात बड़े ग़ैर-ओ-फ़िक्र के बा’द ज़ाहिर होती है कि तर्क-ए-ख़ुदी में मशग़ूलियत के
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
जायसी और प्रेमतत्व पंडित परशुराम चतुर्वेदी, एम. ए., एल्.-एल्. बी.
अर्थात् प्रेम के फंदे में जो पड़ गया वह कभी नहीं छूटता। प्राण दे देने पर