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सूफ़ी लेख
महाकवि सूरदासजी- श्रीयुत पंडित रामचंद्र शुक्ल, काशी।
ऊधो! मनमानो की बात! जरत पतंग दीप में जैसे औ फिरि फिरि लपटात।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
अमीर खुसरो- पद्मसिंह शर्मा
पहले तिय के हीय मैं उमगत प्रेम-उमंग।आगे बाती बरति है, पाछे जरत पतंग।
माधुरी पत्रिका
सूफ़ी लेख
कबीर के कुछ अप्रकाशित पद ओमप्रकाश सक्सेना
घाट ओ घाट वाट व सभी, कोटिन में कोउ तरे। दिपक देषी पतंग हलक्यो, जीव देत न डरे।
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
आज रंग है !
रंगों से हिंदुस्तान का पुराना रिश्ता रहा है. मुख़्तलिफ़ रंग हिंदुस्तानी संस्कृति की चाशनी में घुलकर
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
जिन नैनन में पी बसे दूजा कौन समाय
पत्नी के चेहरे पर इतने दिनों में पहली बार थोड़ी राहत दिखी. रिपोर्ट सुधरने लगी थी.
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
उदासी संत रैदास जी- श्रीयुत परशुराम चतुर्वेदी, एम. ए., एल-एल. बी.
-पद, 25अर्थात् आदि, मध्य एवं अतः इन तीनों में एक ही प्रकार निर्विकार रहता हुआ सब
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की पाँचवी क़िस्त
मैंने जो चार मंजिले कही है ये दृष्टान्तों के द्वारा समझ में आ सकती है। पहले
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
हाफ़िज़ की कविता- शाल़ग्राम श्रीवास्तव
“आग वह नहीं है जिसकी शिखा पर दीपक हँसता हैं, अर्थात् जिससे दीपक जलता है, बल्कि
सरस्वती पत्रिका
सूफ़ी लेख
पदमावत में अर्थ की दृष्टि से विचारणीय कुछ स्थल - डॉ. माता प्रसाद गुप्त
रावन राइ रूप सब भूलै दीपक जैस पतंग।।राइ के संबंध में डॉ. अग्रवाल की टिप्पणी हैः
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
जायसी और प्रेमतत्व पंडित परशुराम चतुर्वेदी, एम. ए., एल्.-एल्. बी.
अर्थात् प्रेम के फंदे में जो पड़ गया वह कभी नहीं छूटता। प्राण दे देने पर
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
कबीरपंथी और दरियापंथी साहित्य में माया की परिकल्पना - सुरेशचंद्र मिश्र
सम्पूर्ण सृष्टि-व्यापार का अवलोकन करने पर यह जिज्ञासा होती है कि इसका विकास किन तत्व से
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
लखनऊ का सफ़रनामा
अब हम लोगों ने अपने क़दम बढ़ाने शुरू’ किए और लखनऊ की सड़कों का तमाशा देखते
रय्यान अबुलउलाई
सूफ़ी लेख
बहादुर शाह और फूल वालों की सैर
भला जमुना ऐसी भरपूर चले और दिल्ली वाले चुपके बैठे रहें, ढंडोरा पिट गया कि कल