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सूफ़ी लेख
शैख़ सलीम चिश्ती
मशहूर तो यूं है कि हिन्दुस्तान में इस्लाम का ज़माना मोहम्मद ग़ौरी से शुरूअ’ होता है
ख़्वाजा हसन निज़ामी
सूफ़ी लेख
महापुरुष ख़्वाजा मुई’नुद्दीन चिश्ती अजमेरी
आल इंडिया रेडियो देहली से ख़्वाजा हसन सानी निज़ामी की हिंदी तक़रीरअगर मैं आप से पूछूँ
ख़्वाजा हसन निज़ामी
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सूफ़ी और ज़िंदगी की अक़दार
हर जमाअ’त और हर गिरोह में ऐसे अश्ख़ास भी शामिल होते हैं जिन्हें शुमूलियत के बावजूद
ख़्वाजा हसन निज़ामी
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क़व्वाली मज़ारों पर और चिल्लों पर
हज़रत निज़ामूद्दीन औलिया की वफ़ात के बा’द आपके मज़ार पर भी क़व्वाली का सिलसिला जारी रहा
अकमल हैदराबादी
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टेलीविज़न पर क़व्वाली की इब्तिदा
हिन्दोस्तान में टीवी बीसवीं सदी के छठी दहाई में आया। यहाँ सबसे पहले इसकी इब्तिदा दिल्ली
अकमल हैदराबादी
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क़व्वाली ग्यारहवीं शरीफ़ और हज़रत ग़ौस पाक के चिल्लों पर
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के चिल्लों पर क़व्वाली के रिवाज और उसकी मक़्बूलियत के बाद हिन्दोस्तान में
अकमल हैदराबादी
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हज़रत ग़ौस ग्वालियरी और योग पर उनकी किताब "बह्र-उल-हयात"
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी शत्तारिया सिलसिले के महान सूफ़ी संत थे. शत्तारी सिलसिला आप के समय बड़ा
सुमन मिश्र
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ख़्वाजा इसहाक़ मग़रिबी और कुछ बातें
शैख़पुरा ज़िले के मटोखर शरीफ़ में मौजूद ख़्वाजा इसहाक मग़रिबी की दरगाह बीसवीं सदी तक उन
सय्यद अमजद हुसैन
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जदीद क़व्वाली पर जोश मलीहाबादी, फ़िराक़ गोरखपूरी और कैफ़ी का असर
मुशाइ’रों में शाइ’र की कामयाबी का दार-ओ-मदार अच्छे कलाम के साथ अच्छे तरन्नुम या तहत-अल-लफ़्ज़ के