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कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
हरम ख़ाने में जब नूरानी क़तरा हो गया दाख़िलउसी तौहीद के क़तरे में अक्सर तिलमिलाती थी
अज़ीज़ुद्दीन रिज़वाँ क़ादरी
कलाम
आग़ोश-ए-तमन्ना में तो होते हैं वो अक्सरआँखों ही को दीदार का यारा नहीं होता
ग़ुलाम मोईनुद्दीन गिलानी
कलाम
उस मक़ाम-ए-क़ुर्ब तक अब 'इश्क़ पहुँचा है जहाँदीदा-ओ-दिल का भी अक्सर वास्ता होता नहीं
जिगर मुरादाबादी
कलाम
तुम्हारी बे-वफ़ाई हम न भूले हैं न भूलेंगेदिया है वो सबक़ तुम ने कि अक्सर याद करते हैं
जलील मानिकपुरी
कलाम
बहार आए दिल-ए-सूफ़ी पे ज़ेर-ए-साया-ए-कामिलचमन पर रंग आ जाता है अक्सर अब्र-ओ-बाराँ में
सय्यद अली केथ्ली
कलाम
मुलाक़ातें भी होती हैं मुलाक़ातों के बा'द अक्सरवो मुझ को भूल जाते हैं मैं उन को याद करता हूँ
हरी चंद अख़्तर
कलाम
हुस्न-ओ-'इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती हैशम्अ' का शो'ला जब लहराया उड़ के चला परवाना भी
आरज़ू लखनवी
कलाम
ये भी सच है वहम कर देता है अक्सर बद-गुमाँये भी सच है तेरी हस्ती पर यक़ीं लाता हूँ मैं