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कलाम
मिर्ज़ा ग़ालिब
कलाम
बनाई मुझ बे-नवा की बिगड़ी नसीब मेरा जगा दियातेरे करम के निसार तू ने मुझे भी जीना सिखा दिया
अज्ञात
कलाम
फ़क़ीर-ए-बे-नवा का साज़-ओ-सामाँ देखते जाओकि शान-ए-फ़क़्र-ओ-फ़ख़्री है नुमायाँ देखते जाओ
शाह मोहसिन दानापुरी
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है
शकील बदायूँनी
कलाम
महव-ए-जमाल-ए-यार को फ़ुर्सत-ए-बंदगी नहींउस के हुज़ूर बंदगी कुफ़्र है बंदगी नहीं
शाह अलीमुल्लाह सफ़ी
कलाम
सहबा अकबराबादी
कलाम
अल्लामा इक़बाल
कलाम
लुभाता है निहायत दिल को ख़त-ए-रुख़्सार-ए-जानाँ काघसीटेगा मुझे काँटों में सब्ज़ा उस गुलिस्ताँ का
अज्ञात
कलाम
दिल जिगर को आश्ना-ए-दर्द-ए-उल्फ़त कर दियाइक निगाह-ए-नाज़ ने सामान-ए-राहत कर दिया