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कलाम
ख़्वाजा हैदर अली आतिश
कलाम
गुज़रना सर से बाम-ए-’इश्क़ का चढ़ना उतरना हैजो मरना है वो जीना है जो सूली है वो ज़ीना है
वतन हैदराबादी
कलाम
ग़ुंच-सा लब बंद है शोर-ए-‘अनादिल दिल में हैलब पे है मोहर-ए-सुकूत इक शोर बरपा दिल में है
ख़्वाजा हमीदुद्दीन अहमद
कलाम
जिस्म दमकता ज़ुल्फ़ घनेरी रंगीं लब आँखें जादूसंग-ए-मरमर ऊदा बादल सुर्ख़ शफ़क़ हैराँ आहू
जावेद अख़्तर
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है
शकील बदायूँनी
कलाम
महव-ए-जमाल-ए-यार को फ़ुर्सत-ए-बंदगी नहींउस के हुज़ूर बंदगी कुफ़्र है बंदगी नहीं
शाह अलीमुल्लाह सफ़ी
कलाम
सहबा अकबराबादी
कलाम
अल्लामा इक़बाल
कलाम
लुभाता है निहायत दिल को ख़त-ए-रुख़्सार-ए-जानाँ काघसीटेगा मुझे काँटों में सब्ज़ा उस गुलिस्ताँ का
अज्ञात
कलाम
दिल जिगर को आश्ना-ए-दर्द-ए-उल्फ़त कर दियाइक निगाह-ए-नाज़ ने सामान-ए-राहत कर दिया