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कलाम
बा'द अज़ फ़ना मज़ार पे आने से फ़ाइदामरने से हम मिटे तो जलाने से फ़ाइदा
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
बर्गश्ता-ओ-बद-ज़न सा पाते हैं ख़ुदा हाफ़िज़अब हम तिरी महफ़िल से जाते हैं ख़ुदा हाफ़िज़
ताबिश कानपुरी
कलाम
आंधियों और मौज-ए-तूफ़ाँ से गुज़र जाने के बा'दनाव डूबी है मिरी दरिया उतर जाने के बा'द
साग़र सिल्लोड़ी
कलाम
न किसी चीज़ में दिल उन का लगा मेरे बा'दयाद आती ही रही मेरी वफ़ा मेरे बा'द
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
मन अज़ दर्द-ए-जुदाई ख़ातिर-ए-अंदोहगीं दारमकि दुश्मन दर बग़ल हम-चुँ दिल-ए-ख़ुद दर कमीं दारम
दीवान उल्फ़त
कलाम
सब का मर्जा’ बन गया है सब को ठुकराने के बा'दज़िंदगी पाई किसी ने तुम पे मर जाने के बा'द
कामिल शत्तारी
कलाम
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे 'इश्क़ के जज़्बात-ए-कामिल सेज़मीं गर्दूं से टकराई जहाँ दिल मिल गया दिल से
अज़ीज़ मेरठी
कलाम
शान-ए-ख़ुदा भी आप महबूब-ए-ख़ुदा भी आप हैंतज्सीम-ए-हक़ भी आप हैं और हक़-नुमा भी आप हैं