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अल्लाह के प्यारे सजन गाहे नज़र बर मन फ़िगनधो-धो पियूँ तुम्हरे चरन गाहे नज़र बरमन फ़िगन
जाता तो उस के कूचे में है बार बार दिलखाए न चोट यास की उमीद-वार दिल
बर-गश्ता-ए-यज़्दाँ से कुछ भूल हुई हैभटके हुए इंसाँ से कुछ भूल हुई है
क्यूँ न अश्क-बार हुआ करूँ क्यूँ न बे-क़रार रहा करूँन क़रार आए तेरे सिवा तो तू ही बता कि मैं क्या करूँ
ऐ जान मेरी आँखों पर ये बार-ए-नज़री क्यूँ हैतुम बाम पे आए हो ये जल्वा गरी क्यूँ है
भेज कर हज़ारों को काम कुछ न बर आयानाम ले के अहमद का यार ख़ुद उतर आया
कोई उम्मीद बर नहीं आतीकोई सूरत नज़र नहीं आती
तिरे क़रीब हुए जब से अश्क-बार हुएहज़ार बार कहाँ सद हज़ार बार हुए
जिस को एक बार वो दीदार दिखा देते हैं'उम्र-भर के लिए दीवाना बना देते हैं
सर दे के उठाया है तिरा बार-ए-अमानतजो खेल गए जान पे ए यार हमें हैं
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