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कलाम
फ़ना का जाम ऐ साक़ी मैं पी-पी लूँ तू भर-भर देबक़ा की मय से आँखें मिस्ल-ए-नर्गिस-ए-मस्त कर-कर दे
अलाउद्दीन जलाली
कलाम
तेरे मय-ख़ाना में ऐ साक़ी ये कैसा जोश हैदेखिए जिस रिंद को भी बे-ख़ुद-ओ-मदहोश है
अब्दुल हादी काविश
कलाम
मैं भी पी लेता जो होता कोई तक़दीर में जामदस्त-ए-साक़ी में सुबू था मुझे मा'लूम न था
अकबर वारसी मेरठी
कलाम
बजाए दस्त-ए-साक़ी चूमते हैं संग-ए-असवद कोनज़र आता है जल्वा बे-रुख़-ए-जानाना का’बे में
नुशूर वाहिदी
कलाम
ख़ुदा-ए-लम-यज़ल का दस्त-ए-क़ुदरत तू ज़बाँ तू हैयक़ीं पैदा कर ऐ ग़ाफ़िल कि मग़्लूब गुमाँ तो है
अल्लामा इक़बाल
कलाम
दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्याज़ख़्म के भरते तलक नाख़ुन न बढ़ जावेंगे क्या
मिर्ज़ा ग़ालिब
कलाम
न तु कश्फ़-ए-दस्त-ए-मसीह दे न तजल्ली-ए-सर-ए-तूर देतेरे बस में अगर ऐ ख़ुदा मुझे ज़िंदगी का शु'ऊर दे