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कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
ऐ हुस्न-ए-जहाँ सोज़-ए-जहाँ दीद-ए-जहाँ दादतश्बीह तेरी अहल-ए-क़लम ढूँढ रहे थे
मुंशी रज़ीउद्दीन अहमद
कलाम
ख़याल आया जो उस मह-रू को गुल-गश्त-ए-ख़ियाबाँ कानज़र कुछ और ही आने लगा 'आलम-ए-गुलिस्ताँ का