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कलाम
उन ने कहा ये मुझ से अब छोड़ दुख़्त-ए-रज़ कोपीरी में ऐ दिवाने ये कौन मस्तियाँ हैं
मोहम्मद रफ़ी सौदा
कलाम
कनजड़े की सी हाट है दुनिया जिंस है सारे इकट्ठेमीठे चाहे मीठे ले ले खट्टे चाहे खट्टे
बहादुर शाह ज़फ़र
कलाम
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
ख़ादिम हसन अजमेरी
कलाम
मोहम्मद बादशाह क़दीर
कलाम
क़ुर्बान-ए-फ़ना एक तजल्ली-ए-तेरी होएज़ुल्मत-कदा-ए-हस्तती-ए-मौहूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
तुम्हें मैं जानता हूँ तुम बदलते हो हज़ारों रंगनहीं मैं ग़ैर उठा कर पर्दा-ए-रू-ए-बशर आओ
आग़ा मोहम्मद दाऊद
कलाम
यही इरशाद-ए-मुर्शिद है यही तो राज़-ए-मुर्शिद हैमुराद पाया मेरा नफ़्स-ए-’अदू-ए-बे-शरम मेरा
मोहम्मद बादशाह क़दीर
कलाम
लब्ब-ए-लुबाब-ए-जुमला कमालात-ए-'इश्क़ हैमुम्किन नहीं कि 'इश्क़ भी हो औलिया न हो
ग़ुलाम मोहम्मद जलुआनवी
कलाम
औज-ए-विलायत के हो माह तख़्त-ए-ख़िलाफ़त के हो शाहदीन-ए-मोहम्मद की पनाह ऐ बादशाह-ए-अस्फ़िया
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
कलाम
ढूँढ उस जगह किशवर-ए-’अली बाब-ए-’इल्म है’उक़्दा वहीं से होवे है हल मुश्किलात का
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
मस्ति-ए-सीना ब-सीना मस्त हम साक़ी अलस्तदम-बदम हमदम रवाँ चौबीस हज़ार तारों में हूँ