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कलाम
नीस्ती हस्ती है यारो और हस्ती कुछ नहींबे-ख़ुदी मस्ती है यारो और मस्ती कुछ नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
अफ़्साना मेरे दर्द का उस यार से कह दोफ़ुर्क़त की मुसीबत को दिल-आज़ार से कह दो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
तुम्हारे 'इश्क़ में गर जान के देने से मैं अड़ताकोई दिन जी के आख़िर मौत से मरना ही फिर पड़ता
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
मद्रसे में आशिक़ों के जिस की बिस्मिल्लाह होउस का पहला ही सबक़ यारो फ़ना फ़िल्लाह हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दियाहुई महव-ए-हैरत-ए-बे-खु़दी मुझे आईना सा बना दिया
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
काफ़िर-ए-’इश्क़ हूँ मैं बंदा-ए-इस्लाम नहींबुत-परस्ती के सिवा और मुझे काम नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
मुझे बे-ख़ुदी ये तू ने भली चाशनी चखाईकिसी आरज़ू की दिल में नहीं अब रही समाई
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
ख़ानक़ाह-ए-चिश्त में जिस ने क़दम पहला रखादूसरा उस का क़दम फिर अर्श-ए-बाला पर हुआ
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
सरज़मीन-ए-चिश्त की आब-ओ-हवा कुछ और हैदीन-ओ-दुनिया से निराला और ही कुछ तौर है
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
इश्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो होऐश-ओ-निशात-ए-ज़िंदगी छोड़ दिया जो हो सो हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
सच है शह-रग से क़रीं अल्लाह मियाँ है रे मियाँतुझ में ये माद्दा समझने का कहाँ है रे मयाँ