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कलाम
जमाल-ए-इब्तिदा बन कर जलाल-ए-इंतिहा होकरबशर दुनिया में आया मज़हर-ए-शान-ए-ख़ुदा होकर
तुरफ़ा क़ुरैशी
कलाम
शकील बदायूँनी
कलाम
आईना-ए-’अली को देख हुस्न-ए-मोहम्मदी को देखकर के निसार जान-ए-वतन 'आशिक़-ए-सरफ़राज़ बन
शाह मोहसिन दानापुरी
कलाम
ओ दुश्मन-ए-इंसाफ़ ख़ुशी कौन सी तुम कोग़म बिन तिरे क्यूँ कर दिल-ए-मग़्मूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
तमन्नाएँ वो बर लाएँ पढ़ें कलिमा वो पढ़वाएँअलम-नश्रह-लका-सदरक से पुर दिल का हरम मेरा
मोहम्मद बादशाह क़दीर
कलाम
पढ़ पढ़ इलम हज़ार कताबाँ आलिम होए भारे हूहर्फ़ इक इश्क़ दा पढ़ न जाणन भुल्ले फिरन विचारे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
फ़ना बन कर मलाल ख़ातिर महज़ून-ए-'अयाँ क्यूँ होकोई ये भी दिगर पूछे कि सरगर्म-ए-फ़ुग़ाँ क्यूँ हो