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ख़ार-ए-हसरत क़ब्र तक दिल में खटकता जाएगामुर्ग़-ए-बिस्मिल की तरह लाशा फरकता जाएगा
बाद-अज़ फ़ना जो क़ब्र पे आया वो ऐ 'वज़ीर'पहुँचाने उस को रूह मेरी क़ब्र तक गई
क़ब्र-ए-'मुश्ताक़' पर न तुम आएइंतिज़ारी जनाब ख़ूब रही
क़ब्र-ए-'मुश्ताक़' पर ज़रा आओबेबसी का मज़ार है प्यारे
नकीरैन से क़ब्र में तेरी बाबतरहा देर तक तज़्किरा चुपके-चुपके
'दाग़' की क़ब्र मिटा कर बोलेये निशान था उसी सौदाई का
बेकसों की क़ब्र पर देखो तो आजअब्र-ए-रहमत शामियाना हो गया
चैन मर्दों को क़ब्र में भी नहींआसमान हो तह-ए-ज़मीं न कहीं
दफ़्न कर के क़ब्र में बोली क़ज़ाअब यहाँ तुम सोते रहना चंद रोज़
मैं रुख़्सार-ए-शह का हूँ 'आशिक़ 'नसीम'मिरी क़ब्र फूलों से भर जाएगी
अल्लाह जाने क़ब्र है किस ना-मुराद कीअरमान रो रहे हैं सिरहाने मज़ार के
दिल-ए-ज़िंदा हर क़ब्र तन से उठेगाजो नज़दीक है वो क़ियामत हमीं हैं
कभी क़ब्र-ए-'मुश्ताक़' पर से जो गुज़रेकहा ये निशाँ है मिटाने के क़ाबिल
खुद रही है क़ब्र तलवारों से आजदफ़्न 'ग़ौसी' का है कू-ए-यार में
कैसा फ़िशार कैसी अज़िय्यत फ़िशार कीलज़्ज़त मिली है क़ब्र में आग़ोश-ए-यार की
मन लागो मेरो यार फ़क़ीरी मेंमन लागो मेरो यार फ़क़ीरी में
नाम अपना ज़िंदगी में यहाँ तकबा'द-ए-फ़ना भी क़ब्र का मुतलक़ निशाँ न हो
फ़ातिहा को जो आए कहा ये शोख़ी नेचराग़-ए-क़ब्र ज़रा हाथ से बुझा देना
अपनी हस्ती को ग़म में डुबो जाएगाक़ब्र की गोद में जा के सो जाएगा
क़ब्र ही में मुझे ऐ हश्र पड़ा रहने देशक्ल दिखलाने के क़ाबिल ये सियहकार नहीं
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