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कलाम
नाज़ाँ शोलापुरी
कलाम
ऐ शो’ला-ए-जवाला जब से लौ तुझ से लगाए बैठे हैंइक आग लगी है सीने में और सब से छुपाए बैठे हैं
कामिल शत्तारी
कलाम
वो देखो लब-ए-साहिल आए अल्ताफ़-ओ-करम की होगी नज़रऐ डूबने वालो ग़म न करो साहिल पे सफ़ीना आता है