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कलाम
दोनों संग-ए-राह-ए-तलब हैं राह-नुमा भी मंज़िल भीज़ौक़-ए-तलब हर एक क़दम पर दोनों को ठुकराता जा
हफ़ीज़ जालंधरी
कलाम
अब्र है जाम है मीना है मय-ए-गुल-गूँ हैहै सब अस्बाब-ए-तरब साक़ी-ए-गुलफ़ाम नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
‘मीरान’ शाह सर के बल तू अब चल पीरान-ए-कलियरफ़ैज़-ए-'आम गंज-ए-मख़्फ़ी साबिर लुटा रहा है
मीराँ शाह जालंधरी
कलाम
सुंदर शामी छैल-छबीला दोऊ जगत ऊजियारा हैवाँ की दरस बिन कल न पड़त है रेन दिना मोहे तरसत है
मीराँ शाह जालंधरी
कलाम
तरब आश्ना-ए-ख़रोश हो तू नवा है महरम-ए-गोश होवो सरोद क्या कि छुपा हुआ हो सुकूत-ए-पर्दा-ए-साज़ में
अल्लामा इक़बाल
कलाम
अख़्तर शीरानी
कलाम
आईना-ए-’अली को देख हुस्न-ए-मोहम्मदी को देखकर के निसार जान-ए-वतन 'आशिक़-ए-सरफ़राज़ बन