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कलाम
या दिन की बातें होती हैं या रात की बातें होती हैंये दुनिया है इस दुनिया में हर बात की बातें होती हैं
मुनव्वर बदायूँनी
कलाम
ग़ुंच-सा लब बंद है शोर-ए-‘अनादिल दिल में हैलब पे है मोहर-ए-सुकूत इक शोर बरपा दिल में है
ख़्वाजा हमीदुद्दीन अहमद
कलाम
नहीं हूँ कुछ भी मगर क्या कहूँ कि क्या हूँ मैंफ़ज़ा-ए-क़ुद्स की गूँजी हुई सदा हूँ मैं
मुख़्तार बदायूँनी
कलाम
इश्क़ दी गल्ल अवल्ली जेहड़ा शरआ थीं दूर हटावे हूक़ाज़ी छोड़ कज़ाई जाण जद इश्क़ तमाँचा लावे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
हया बदायूँनी
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है
शकील बदायूँनी
कलाम
शौक़ से ना-कामी की बदौलत कूचा-ए-दिल भी छूट गयासारी उमीदें टूट गईं दिल बैठ गया जी छूट गया
फ़ानी बदायूँनी
कलाम
मेरे ही ग़म की तर्जुमान-ए-फ़ितरत है दीवाना होमुझ को वो दास्ताँ सुना जो मेरी दास्ताँ न हो