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Sheikh Abdul Haque Dehlvi

1551 - 1642 | Delhi, India

Sheikh Abdul Haque Dehlvi

Sufi Quotes 11

अज़्म-ओ-नीयत की निगाह से तर्क-ए-तअल्लुक़ ये है कि कोई अमल ग़ैर ख़ुदा के लिए हो। सारे काम केवल ख़ुदा के लिए हों और हर वो काम जिस की तू नीयत करे, नेक नीयत से हों। जब नीयत ठीक हो जाए उस वक़्त अमल शुरू किया जाए। या तो अमल ख़ुदा के लिए करे, वर्ना अमल ही करे।

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चाहिए कि किसी से इल्मी बहस में झगड़ा करो और तकलीफ पहुँचाओ। अगर ये समझ लो कि दूसरा हक़ की तरफ़ है, तो उस की बात मान लो और अगर ऐसा नहीं है तो उस को दो-तीन बार समझाओ। अगर माने तो कहो कि मुझे तो यही मालूम है, मुमकिन है कि जैसा तुम कहते हो वैसा ही हो, फिर झगड़ने की बात क्या है।

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ख़ुदा के सिवा हर चीज़ से दिल को ख़ाली कर। जब घर बेकार चीज़ों से भरा हुआ हो, तो ख़ाली किए बग़ैर उस में सजावटी और ख़ूबसूरत क़ीमती सामान नहीं रख सकते। शराब की बोतल में गुलाब का इत्र कैसे भरा जा सकता है? अगर घर में सम्मानित मेहमान का इस्तक़बाल करना है, तो घर की साफ़-सफ़ाई ज़रूरी है।

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ख़ुदा की पहचान के कई दर्जे हैं और नफ़्स की पहचान, जो ख़ुदा की पहचान की शर्त है उस के भी कई दर्जे हैं। कुल मिला कर ये कि मआरिफ़त का हर दर्जा, ख़ुदा की पहचान का एक दरीचा खोल देता है।

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महान मशायख़ों को आख़िरत और बहिश्त की बशारतें उन की सुबह के वक़्त की दुआओं के बदौलत मिली हैं।

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