आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
रोचक तथ्य
سکندر شاد قوال کی آواز میں فلم ’’آ قسم کھالیں‘‘ کی طرز پر لکھی ہوئی مقبولِ عام نعتیہ گیت۔
हैं आप हादी-ए-आ'ज़म
हैं आप नूर-ए-मुजस्सम
आप के नूर से आक़ा
दोनों जहाँ चमके चमाचम
आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
रू-ए-ज़मीं पे कोई ऐसा नबी आया नहीं
सानी कहाँ फिर होगा क़द का भी साया नहीं
ज़ुल्फ़ वल-लैल की आयत
चेहरा यासीन की सूरत
जैसी पाई है सूरत
वैसी है आप की सीरत
सल्ले-'अला मर्हबा मर्हबा या-रसूलल्लाह
आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
आप मे'राज की शब पहुँचे जब सू-ए-फ़लक
फ़र्श आँखों का बिछाते थे सर-ए-राह-ए-मलक
मीम का पर्दा उठा
नूर से नूर मिला
अपने महबूब को फिर
देख कर रब्ब-ए-'उला
ख़ुद हो गया है फ़िदा हाँ या-रसूलल्लाह
आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
बू-जहल बोला अगर आप हैं सच्चे नबी
मेरी मुट्ठी में है क्या जल्द बतलाओ अभी
सुन के फ़रमाए नबी
है मुझे रब पे यक़ीं
बात जिस दम ये सुनी
कंकरों ने फिर वहीं
कलिमा नबी का पढ़ा हाँ या-रसूलल्लाह
आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
बोले हुसैन-ओ-हसन प्यारे बिलाल-ए-हज़ीं
हम को सुनाइएगा आप अज़ाँ अपनी अभी
थोड़ी अज़ाँ थी दी
आया जो नाम-ए-नबी
'नाज़' ये कहते हुए
रूह फिर तन से चली
कीजिए अब न जुदा हाँ या-रसूलल्लाह
आप हैं नूर-ए-ख़ुदा हाँ या-रसूलल्लाह
- पुस्तक : Sikandar Shad Qawwal, Part 1 (पृष्ठ 3)
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