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दुनिया की फ़ज़ा बस एक नज़र में ज़ेर-ओ-ज़बर हो जाती है

अमजद हैदराबादी

दुनिया की फ़ज़ा बस एक नज़र में ज़ेर-ओ-ज़बर हो जाती है

अमजद हैदराबादी

MORE BYअमजद हैदराबादी

    दुनिया की फ़ज़ा बस एक नज़र में ज़ेर-ओ-ज़बर हो जाती है

    वो देखते हैं उन नज़रों से नज़रों को नज़र हो जाती है

    वो दुनिया से खो जाता है और क्या से क्या हो जाता है

    उस मस्त-नज़र की जिस पर भी इक बार नज़र हो जाती है

    जब आती है रात वो आते हैं साथ अपने उजाला लाते हैं

    छा जाता है अँधेरा आँखों में जिस वक़्त सहर हो जाती है

    तदबीर कोई चलती ही नहीं तक़दीर कभी टलती ही नहीं

    हर चंद बदी से बचता हूँ उस पर भी मगर हो जाती है

    हर वक़्त गुज़रता रहता है ये दरिया बहता रहता है

    हो 'ईद का दिन या शाम-ए-अलम हर हाल बसर हो जाती है

    मौजूद जो शय हो जाती है मा'दूम नहीं फिर हो सकती

    दुनिया-ए-वुजूद में 'अमजद' तग़ईर-ए-सुवर हो जाती है

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