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रखूँ किस बिना पर आशियाँ की निगाह-ए-शरर का भरोसा नहीं है

क़ैसर रत्नागीरवी

रखूँ किस बिना पर आशियाँ की निगाह-ए-शरर का भरोसा नहीं है

क़ैसर रत्नागीरवी

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    रखूँ किस बिना पर आशियाँ की निगाह-ए-शरर का भरोसा नहीं है

    बने क्यूँ आवारगी उस की क़िस्मत जिसे अपने घर का भरोसा नहीं है

    कभी मुल्तफ़ित है किसी वक़्त बरहम मुझे उस नज़र का भरोसा नहीं है

    ये दौर-ए-क़यामत नहीं है तो क्या है बशर को बशर का भरोसा नहीं है

    सर-ए-बज़्म इफ़्शा हो राज़-ए-उल्फ़त नहीं चश्म-ए-तर का भरोसा नहीं है

    दिल-ए-मो'तबर में ग़म-ए-मुख़्तसर है दिल-ए-मो'तबर का भरोसा नहीं है

    ये मे'यार-ए-हुस्न-ए-’अक़ीदत तो देखो यक़ीं-दर-यक़ी पर जिए जा रहा हू

    दु'आओं पे है ए'तिमाद-ए-मुकम्मल ये माना असर का भरोसा नहीं है

    हुई राएगाँ स'ई-ए-पैहम पूछो मेरी हसरतों का जनाज़ा उठा है

    वहाँ ले के आई तमन्ना-ए-मंज़िल जहाँ रह गुज़र का भरोसा नहीं है

    लिए तो चला है मुझे साथ अपने ब-सद इश्तियाक़-ओ-ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत

    जाने कहाँ छोड़ दे साथ मेरा मुझे राहबर का भरोसा नहीं है

    रुस्वा हो ज़ौक़-ए-नमाज़-ए-मोहब्बत है डर राएगाँ हो उल्फ़त के सज्दे

    तेरा और यक़ीनन तेरा दर रहेगा मुझे अपने सर सिर भरोसा भरोसा नहीं है

    हर एक साँस पर है गुमाँ आख़िरी है पूछो 'अजब 'आलम जांकनी है

    बताऊँ मैं क्या हाल-ए-बीमार-ए-उल्फ़त समझ लो सहर का भरोसा नहीं है

    मैं फ़नकार हूँ शाइरी मेरा फ़न है मरकज़-ए-तवज्जोह का दिल की लगन है

    फ़िदाई हूँ 'इल्म-ओ-हुनर का 'क़ैसर' मुझे सीम-ओ-ज़र का भरोसा नहीं है

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